गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग

उत्तर प्रदेश सरकार

गन्ने की स्वीकृति प्रजातियाँ

अ-शीघ्र पकने वाली प्रजातियॉं ब-मध्य देर से पकने वाली
(सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश हेतु) (पश्चिमी व मध्य उ0प्र0 हेतु)
को0शा0 8436 को0शा0 8432
को0शा0 88230 को0शा0 94257
को0शा0 95255 को0शा0 97264
को0शा0 96268 को0शा 96275
को0जे0 64 को0से0 92423
को0से0 95436 को0पंत 84212
  को0शा0 97261
  को0शा0 95422
(पूर्वी उत्तर प्रदेश हेतु) (पूर्वी उत्तर प्रदेश हेतु)
को0से0 98231 यू0पी0 39
को0से0 00235 को0शा0 8432
को0से0 01235 को0शा0 91230
स-जल प्लावित क्षेत्रों के लिए सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश हेतु। को0से0 95422
यू0पी0 9530 यू0पी0 22
को0से0 96436 यू0पी0 0097

उन्नतिशील प्रजातियों के बीज की उपलब्धता के स्थान

प्रदेश में गन्ना बुवाई शरद काल एवं बसन्तकाल में की जाती है। अधिकांश बुवाई बसन्त काल में होती है जिसके बीज की व्यवस्था गन्ना विकास परिषदों, गन्ना विकास समितियों एवं चीनी मिलों के माध्यम से करायी जाती है। गन्ना कृषकों को उन्नतिशील, रोगरहित एवं शीघ्र पकने वाली प्रजातियों का प्रमाणित बीज जिला गन्ना अधिकारी, ज्ये0गन्ना विकास निरीक्षक एवं चीनी मिल के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता है। गन्ना समितियों में बीज क्रम समितियों में बीज क्रय करने के लिए ऋण की व्यवस्था की जाती है। गन्ना शोध परिषद से प्राप्त केन्द्रक बीज से आधार पौधशालाएं स्थापित की जाती है। आधार पौधशाला से प्राथमिक पौधशाला एवं प्राथमिक पौधशाला से सामान्य खेती के लिए गन्ना कृषकों को बीज उपलब्ध कराया जाता है। गन्ना बीज के लिए पौधशालाएं गन्ना कृषकों के यहॉं तैयार की जाती है।