गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग

उत्तर प्रदेश सरकार

वैज्ञानिक गन्ना खेती की विधियां

गन्ने की पिद्दैती बुवाई से अच्छी उपज विधि

1 खेत की तैयारी-पलेवा के बाद 3-4 जुताई।
2 गन्ने की उपयुक्त जातियों जैसे को0शा0 767, 88216, 88230, 95255, 94257 व को0शा0 94270 को चुनें। 
3 स्वस्थ गन्ने का ऊपरी भाग बोयें। 
4 बीजोपचार- बीज गन्ने को 4-6 घण्टे पानी में भिगोकर तथा पारायुक्त रसायन में डुबो लें। 
5 गन्ने की पंक्तियों के बीच दूरी 60 से0मी0 रखें।
6 बुवाई के समय उपयुक्त नमी रखें व अन्धी गुड़ाई करें। 
7 नत्रजन के प्रयोग में विलम्ब नहीं, आधी मात्रा बुवाई के समय शेष आधी जमाव होने पर ​सिंचाई के 2-3 दिन बाद। 
8 सही समय पर हल्की व बार-बार 10-15 दिन के अन्तर पर ​सिंचाई।
9 फसल सुरक्षा, गुड़ाई व बंधाई समय पर। 

पंक्तियों के मध्य की दूरी एवं बीज

सामान्यत: पंक्ति से पंक्ति के मध्य 90 से0मी0 दूरी रखने एवं तीन आंख वाले टुकड़े बोने पर लगभग 37.5 हजार टुकड़े अथवा गन्ने की मोटाई के अनुसार 40 से 60 कुन्तल बीज गन्ना प्रति हेक्टयर की दर से प्रयोग किया जाता है। पंक्तियों के मध्य की दूरी 60 से0मी0 रखने तथा तीन आंख वाले टुकड़े लेने पर इनकी संख्या लगभग 56.25 हजार प्रति हेक्टयर हो जाती है।

पंक्तियों के मध्य की दूरी 90 सेंटीमीटर

यह सामान्य परि​स्थितियों एवं गन्ने के साथ अन्त: फसल लेने की दशा में सर्वाधिक उपयुक्त दूरी है।

पंक्तियों के मध्य की दूरी 60 से0मी0

विलम्ब से गन्ना बोवाई की दशा में, असिंचित एवं कम सिंचाई की उपलब्धता में, कम नत्रजन दिये जाने की दशा में तथा अधिक ठण्ड वाले क्षेत्रों के लिये उपयुक्त हैं।

बीज गन्ना

सामान्यत: स्वीकृत पौधशालाओं से संस्तुत उन्नतशील गन्ना प्रजातियों का रोग व कीटमुक्त, शत-प्रतिशत शुद्ध 12 माह की आयु की फसल से बीज का चुनाव किया जाता है किन्तु वैज्ञानिक प्रयोगों से यह सिद्ध हुआ है कि गन्ने के 1/3 ऊपरी भाग का जमाव अपेक्षाकृत अच्छा होता है तथा 2 माह की फसल की तुलना की में 7-8 माह की फसल से लिये गये बीज का जमाव भी अपेक्षाकृत अच्छा होता है। बोने से पूर्व गन्ने के दो अथवा तीन ऑंख वाले टुक्ड़े काटकर कम से कम 2 घण्टे पानी में डुबो लेना चाहिये, तदुपरान्त किसी पारायुक्त रसायन (एरीटान 6 प्रतिशत या बैगलाल 3 प्रतिशत) के क्रमश: 0.25 या 0.5 घोल में शोधित कर लेना चाहिये। बीज शोधन के लिये बावस्टीन 0.1 प्रतिशत घोल का भी प्रयोग किया जा सकता है।

बुवाई

सामान्यतः आदर्श परिस्थितियों में तीन ऑंख वाले पैडे कूडों अथवा नालियों में इस प्रकार डाले जाते हैं कि प्रति फुट कम से कम ऑंख समायोजित हो जाये। अपेक्षाकृत अच्छे जमाव के लिये दो ऑंख वाले पैडे प्रति फुट तीन ऑंख की पर से भी प्रयोग किये जा सकते हैं। बुवाई के उपरान्त नाली में पैडो के ऊपर गामा बी०एच०सी० 20ई.सी. 6.25लीटर या क्लोरपाइरीफस 20 प्रतिशत घोल 5 लीटर को 1875 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर हजारे से छिड कना चाहिए अथवा फोरेट 10 जी.25 कि०गो० या सेविडाल 4:4जी. 25कि०ग्रा० या लिण्डेन 6 जी.20 कि०ग्रा०/हे० की दर से पैड ो के ऊपर प्रयोग करना चाहिए। नालियों को फावड या देशी हल से तुरन्त पाट कर खेत में पाटा लगा देना चाहिए। इससे दीमक व अंकुरवेधक नियंत्रित होते हैं।

कर्षण क्रियायें

अन्धी गुड़ाई

समतल विधि से गन्ना बुवाई के एक सप्ताह में अथवा यदि वर्षा हो जाये अथवा शीघ्र जमाव के लिये हल्की सिंचाई की गयी हो तो अंधी गुड़ाई आवश्यक है। ध्यान रहे कि अंधी गुड़ाई की गहराई अधिकतम 4-5 से0 मी0 से अधिक न हो।