गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग

उत्तर प्रदेश सरकार

सवाल जवाब

प्रश्न 19:- गन्ने की फसल में पायरिला की रोकथाम के उपाय क्या हैं?

उत्तर 19:- यह कीट हल्के भूरे रंग का 10-12 मिलीमीटर लम्बा व चोंचनुमा होता है। इसके शिशु तथा वयस्क गन्ने की पत्ती से रस चूसकर क्षति पहुंचाते हैं। इसका प्रकोप माह अप्रैल से अक्टूबर तक पाया जाता है।

रोकथाम के उपाय

    1. अण्डसमूहों को निकाल कर नष्ट करना।
    2. निम्न कीटनाशकों में से किसी एक को 625 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए-
    (क) क्वीनालफास 25 प्रतिशत घोल 0.80 लीटर प्रति हेक्टेयर।
    (ख) डाइक्लोरवास 76 प्रतिषत घोल 0.315 लीटर प्रति हेक्टेयर।
    (ग) क्लोरोपाइरीफास 20 प्रतिषत घोल 0.80 लीटर प्रति हेक्टेयर।
नोटः- इसके परजीवी इपिरिकेनिया मिलैनोल्यूका (निम्फ एवं व्यस्क) तथा अंड परजीवी टेट्रास्टीकस पायरिली यदि पाइरिला प्रभावित खेत में दिखाई दे तो किसी भी कीटनाशक का प्रयोग नहीं करना चाहिये। ऐसी स्थिति में परजीवी करण को बढाने के लिए सिंचाई का समुचित प्रबन्ध एवं गन्ने में हो रही क्षति को रोकने के लिए यूरिया की टापड्रेसिंग करना चाहिए।

प्रश्न 20:- प्रदेश में गन्ने की बुआई का उपयुक्त समय क्या है?

उत्तर 20:- उत्तर प्रदेश में गन्ने की बुवाई वर्ष में दो बार की जाती हैः- बुवाई का उपयुक्त समय शरदकाल - मध्य सितम्बर से अक्टूबर बसन्तकाल - पूर्वी क्षेत्र मध्य जनवरी से फरवरी - मध्य क्षेत्र फरवरी से मार्च - पश्चिमी क्षेत्र मध्य फरवरी से मध्य अप्रैल

प्रश्न 21:-गन्ने के बीज का बुवाई से पूर्व उपचार कैसे किया जाता है?

उत्तर 21:- परायुक्त रसायन जैसे- एरीटान 6 प्रतिशत या एगलाल 3 प्रतिषत की क्रमश: 280 ग्राम या 560 ग्राम अथवा बाविस्टन की 112 ग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर को 112 लीटर पानी में घोल बना कर गन्ने के पैड़ो को डुबोकर उपचारित करना चाहिए।

प्रश्न 22:- गन्ना बोते समय पंक्ति से पंक्ति की दूरी कितनी होनी चाहिए?

उत्तर 22:- शरदकालीन एवं बसन्तकालीन बुवाई में पंक्ति से पंक्ति के बीच की दूरी 90 सेंटीमीटर तथा देर से बुवाई में 60 सेंटीमीटर की दूरी होनी चाहिए।

प्रश्न 23:-गन्ने की फसल की सिंचाई की उपयुक्त विधियां क्या है?

उत्तर 23:-गन्ने की फसल की सिंचाई निम्न प्रकार से की जानी चाहिये-
  • बुवाई के समय नमी की कमी या देर बसन्त की दषा में पहले सिंचाई बुवाई के तुरन्त बाद करें।
  • पर्याप्त नमी की दषा में उपयुक्त समय पर बुवाई की गयी हो तो पहली सिंचाई अंकुरण होते समय करना चाहिये।
  • मिट्टी के अनुसार ग्रीष्मकाल में 10-12 दिन के अन्तराल पर सिंचाई करना आवष्यक है।
  • वर्षाकाल में 20 दिन तक वर्षा न होने की दषा में सिंचाई अवष्य करें। नाली में सिंचाई करने से प्रति सिंचाई 60 प्रतिषत पानी की बचत होती है।
  • नाली में सिंचाई करने से केवल 2.5-3 घंटा प्रति हेक्टेयर का समय लगता है जिससे ईंधन व डीजल की बचत होती है।

प्रश्न 24:- गन्ने की फसल में कितनी नत्रजन की आवष्यकता होती है?

उत्तर 24:- किलोग्राम नत्रजन प्रति हेक्टयर की आधी मात्रा बावक की कटाई उपरांत सिंचाई के बाद तथा शेष नत्रजन ब्यात आरम्भ होने पर लाइनों में देनी चाहिए। मई-जून में 5 प्रतिषत यूरिया के घोल में 1.0 लीटर प्रति हेक्टेयर क्लोरपाइरीफास 20 ई.सी. कीटनाशक मिलाकर दो बार छिड़काव करना लाभप्रद है।

प्रश्न 25:- गन्ने की खेती में ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें क्या है?

उत्तर 25:- गन्ने की खेती में निम्न महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए-
  • अन्तः फसलों के लिए अलग से संस्तुति अनुसार उर्वरकों की समय से पूर्ति करनी चाहिए।
  • अन्तः फसल काटने के बाद शीघ्रतिशीघ्र गन्ने में सिंचाई व नत्रजन की टाप डेसिंग करके गुड़ाई की जानी चाहिए।
  • रिक्त स्थानों में पहले से अंकुरित गन्ने के पैड़ो से गैप फिलिंग करनी चाहिए।
  • जल ठहराव की अवस्था में अविलम्ब जल निकास का प्रबन्ध करना चाहिए।
  • नमी का संरक्षण व खरपतवार नियंत्रण हेतु जमा पूरा होने के पश्चात रोग/कीटमुक्त गन्ने की पताई की 10 सेंटीमीटर मोटी तह पंक्तियों के बीच में बिठानी चाहिए।
  • सीमिति सिंचाई साधन की स्थिति में एकान्तर नालियों में सिंचाई करना लाभकारी पाया गया है।
  • गामा. बी.एच.सी. का प्रयोग क्षारीय भूमि में नहीं करना चाहिए।
  • चोटीवेधक कीट के नियंत्रण हेतु अप्रैल-मई माह में कीटग्रसित पौधों को खेत से निकालते रहें तथा जून के अन्तिम सप्ताह से जुलाई के प्रथम सप्ताह तक खेत में पर्याप्त नमी होने की दषा में 30 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से कार्बोफ्यूरांन 3 जी गन्ने की लाइनों में डालें।
  • जलप्लावित क्षेत्रों में यूरिया का 5 से 10 प्रतिषत पर्णीय पत्तियों पर छिड़काव लाभदायक पाया गया है।
  • वर्षाकाल में 20 दिन तक वर्षा न होने पर सिंचाई अवष्य करनी चाहिए।

प्रश्न 26:- उत्तर प्रदेश में कौन सी गन्ना फसल प्रतियोगितायें आयोजित की जाती है?

उत्तर 26:- विभाग में गन्ना समितियो, गन्ना विकास परिषदों, चीनी मिलों, बीज निगमों तथा गन्ना संघ के अंशदान द्वारा संचालित गन्ना प्रतियोगिताओं का विस्तृत विवरण इस प्रकार है-
  • जोनल गन्ना प्रतियोगिता (चीनी मिल परिक्षेत्र स्तर पर)
  • क्षेत्रीय गन्ना प्रतियोगिता (संयुक्त/उप गन्ना आयुक्त परिक्षेत्र स्तर पर)
  • राज्य गन्ना प्रतियोगिता (राज्य स्तर पर)
  • गन्ने की मुख्य फसल पौधा और पेड़ी होने के कारण उक्त प्रतियोगितायें भी दोनों तरह की फसलों के लिए अलग-अलग प्रतिवर्ष आयोजित की जाती है।